जनवादी लेखक संघ ने हिन्दी अकादमी दिल्ली सरकार के ऐसे विद्रूप विज्ञापन पर जताया कड़ा एतराज़
___सम्मानों के नाम बदले जाने पर भी जाहिर की कड़ी नाराजगी....!!
___ जनवादी लेखक संघ ने हिन्दी अकादमी दिल्ली सरकार के ऐसे विद्रूप विज्ञापन पर जताया कड़ा एतराज़
____ विज्ञापन को तत्काल प्रभाव से ख़ारिज किया जाए तथा पूर्व घोषित सम्मानों को प्रदान करने के बाद ही कोई अगली कार्यवाही करने पर दिया बल..!!
___सम्मानों के नाम बदले जाने पर भी जाहिर की कड़ी नाराजगी….!!
मैनपुरी / उत्तर प्रदेश …!!
जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. नलिन रंजन सिंह कहां की भाषा, साहित्य और कला संबंधी असंगतियों, विसंगतियों तथा विद्रूपताओं के पुलिन्दे के रूप में दिनांक 10 जून 2026 को दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के अंतर्गत काम करने वाली हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने साहित्यकार सम्मान योजना का विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन पढ़ने पर पता चलता है कि साहित्यकार की इस नई अवधारणा में पत्रकार तथा भाषाकर्मी, भाषाशास्त्री भी आते हैं। अब तक सम्मान के लिए जानकारों, विशेषज्ञों से संस्तुतियाँ माँगी जाती थीं लेकिन इस बार लिखा गया है कि सम्मान के इच्छुक स्वयं आवेदन करें…!!
उन्होंने कहा कि कुल सोलह श्रेणियों में दिए जाने वाले सम्मान हेतु जीवन पर्यन्त सेवा प्रचार प्रसार को आधार बनाया गया है। शलाका सम्मान हिन्दी अकादमी का सर्वोच्च सम्मान हुआ करता था जो इस बार भी है लेकिन उसमें जाने किस तर्क से पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम जोड़ दिया गया है। साहित्य के क्षेत्र में उनकी देन से अभी तक यह देश अनजान है। परंपरा से चले आ रहे शिखर सम्मान को हटाकर दूसरी श्रेणी में अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय संस्कृति तथा ज्ञान परंपरा सम्मान दिए जाने की सूचना है। बतौर कवि-गीतकार अटल बिहारी वाजपेयी का साहित्यिक योगदान लोक विश्रुत है। उन्हें किन कारणों से दूसरे स्थान पर रखा गया है यह हिन्दी अकादमी की संचालन समिति जाने। विडंबना देखिए कि स्वयं संचालन समिति अज्ञात है। अकादमी के वेबसाइट पर संचालन समिति का, उसके सदस्यों का कोई उल्लेख नहीं है। तीसरी श्रेणी में रानी अहिल्याबाई होल्कर सम्मान हैै जिसके साथ कोष्ठक में महिला साहित्य रचनाकारों के लिए लिखा गया है। रचनाकार के पहले साहित्य लिखने की समझदारी पर क्या टिप्पणी की जाए! पुनः पंद्रहवीं श्रेणी में मृदुला सिन्हा महिला साहित्यकार सम्मान की सूचना है। इसके साथ कोई कोष्ठकीय जानकारी नहीं है। अगर आप तीसरी और पंद्रहवीं श्रेणी में अंतर जानना चाहें तो एक यह कि इनकी पुरस्कार राशि में एक लाख रुपये का अंतर है। दूसरा यह कि होल्कर सम्मान ‘महिला साहित्य रचनाकार’ को दिया जाएगा तथा मृदुला सिन्हा सम्मान ‘महिला साहित्यकार’ को मिलेगा! हिन्दी भाषा की सेवा हेतु क्रम संख्या 11 और 12 के सम्मान हैं। पहले डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा हिन्दी सेवी सम्मान का स्थान है तथा उसके बाद रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी उत्कर्ष सम्मान है। रामचन्द्र शुक्ल वही हैं जिन्हें हम आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के रूप में जानते हैं या कोई और…??अगर ये हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने वाले समादृत आलोचक आ. रामचन्द्र शुक्ल हैं तो उनके नाम से पहले आचार्य हटाकर तथा उन्हें डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा के बाद रखकर हिन्दी भाषा व साहित्य का अपमान किया गया है। सम्मान की दसवीं श्रेणी में निर्मल वर्मा हिन्दी अनुवाद सम्मान है। इसके साथ कोष्ठक में लिखा गया है अंग्रेजी एवं हिन्दीतर भाषाओं से हिन्दी में अनुवाद के लिए । अंग्रेजी को अलग से रेखांकित क्यों किया गया है ? क्या हिन्दीतर भारतीय भाषाएँ, अन्य यूरोपीय भाषाएँ, एशियाई, लैटिन अमरीकी व अफ्रीकी भाषाएँ अंग्रेजी से कमतर हैं ? क्या यह ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ की दुहाई देने वालों की औपनिवेशिक मानसिकता का सबूत नहीं है? पाँचवीं श्रेणी में वीर सावरकर सम्मान की सूचना है। इसके साथ ब्रेकेट में दर्ज है राष्ट्रीय चेतना के लिए । यह संभवतः लेखन के लिए नहीं, राष्ट्रीय चेतना के प्रचार-प्रसार के लिए दिया जाने वाला सम्मान है। अगर यह अनुमान सही है तो इसका हिन्दी अकादमी से क्या संबंध ? दिल्ली सरकार अलग से अपने कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने की योजना लाए। सावरकर की वीरता तो विवाद का विषय रही ही है हिन्दी के साथ उनका कोई नाता भी नहीं रहा है..!!
सम्मानों की सूची के अंत में आवेदन का दायरा बढ़ाकर बुद्धिजीवियों/साहित्यकारों/लेखकों/कवियों आदि से सम्मान योग्य लोगों से चौदह दिनों के भीतर सम्पूर्ण जीवन-परिचय सहित नाम आमंत्रित किए गए हैं। ये सभी सम्मान चार वर्षों 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए दिए जाएँगे..!!
जनवरी लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक है कि हिन्दी अकादमी ने पहले ही तीन वर्षों 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मान की घोषणा कर चुकी थी। इनमें शलाका सम्मान क्रमशः निर्मला जैन, अशोक वाजपेयी तथा चित्रा मुदगल को दिया जाना था। शिखर सम्मान के लिए बालस्वरूप राही, कुमुद शर्मा और डॉ. श्यामसिंह शशि के नामों का एलान हुआ था। इसी तरह अन्य कोटियों में प्रतिष्ठित नामों की घोषणा हुई थी। इस घोषणा को न तो निरस्त किया गया है और न ही अब तक कोई स्पष्टीकरण आया है। फिर उन्हीं वर्षों हेतु नए सम्मानों की विज्ञप्ति निकालना क्या साहित्यकारों, भाषाकर्मियों का अपमान नहीं है…!!
उन्होंने कहा कि जनवादी लेखक संघ हिन्दी अकादमी दिल्ली सरकार के ऐसे विद्रूप विज्ञापन पर कड़ा एतराज़ करते हुए माँग करता है कि इसे तत्काल प्रभाव से ख़ारिज किया जाए तथा पूर्व घोषित सम्मानों को प्रदान करने के बाद ही कोई अगली कार्यवाही की जाए…!!




